Saturday, 31 December 2016

Path Yojana Lokgeet

आदर्श पाठ योजना 
कक्षा:छटी                                                                             

विषय:हिंदी 

उपविषय: लोकगीत (निबंध)                                                               

लेखक: भगवतशरण उपाध्याय 

सामान्य उद्देश्य - 
          (१) छात्रों के शब्द भण्डार में वृद्धि करन 
          (२) उनकी मानसिक, तार्किक एवं बौद्धिक शक्तियों का 
           विकास करना।
          (३) ज्ञान की अभिवृद्धि करना तथा भावाभिव्यक्ति की क्षमता 
           उत्पन्न करना।
          (४) उनकी आलोचनात्मक प्रव्रत्तियों को जागृत करना।
          (५) छात्रों के चरित्र का उदात्तीकरण करना।
          (६) छात्रों को भाषा के व्यावहारिक स्वरुप का ज्ञान कराना।
          (७) विभिन्न प्रकार की लेखन शैलियों से छात्रों को परिचित कराना।
         
विशिष्ट उद्देश्य-
          (१) छात्रों को लोकगीत की विशेषता तथा उसके भेड़ों का 
          ज्ञान कराना।
          (२) प्रस्तुत निबंध के माध्यम से छात्रों के लेखकीय जीवन के निर्माण             और विकास में योगदान करना।
          
प्रस्तावना-
         (१) किसी के जन्मदिन, विवाह अथवा सामाजिक अवसरों पर स्त्रियाँ            क्या-क्या करती है? (मेहंदी  लगाती है, नए कपडे पहनती हैं, खाना              बनाती है और गीत गाती हैं।)
         (२) यह गीत कहाँ से लिए जाते हैं? (सिनेमा से या जो समाज में                    प्रचलित होते हैं।)
         (३) जो गीत सिनेमा के नहीं होते और परंपरागत रूप से समाज में              प्रचलित होते है वे कैसे गीत कहलाते हैं? (वे लोकगीत कहलाते हैं।)

उद्देश्य कथन-
        आज हम लोग डॉ. भगवतशरण उपाध्याय द्वारा लिखित निबंध                    'लोकगीत' का अध्ययन करेंगे।

आदर्श वाचन-
         अध्यापक द्वारा विराम चिन्हों आदि का ध्यान रखते हुए आदर्श वाचन           प्रस्तुत किया जाएगा। जिसे छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।

अनुकरण वाचन-
          कतिपय छात्रों द्वारा अनुकरण वाचन किआ जाएगा। 

त्रुटि/अशुद्धि निवारण-
          - छात्रों द्वारा वाचन संबंधी त्रुटियों का निवारण करना।
          - अध्यापक द्वारा विराम चिन्हों से युक्त वाक्यों के बारे में छात्रों 
          को समझाना।
          - श्यामपट पर कठिन शब्दों के अर्थ/विलोम शब्द तथा 
         पर्यायवाची लिखना।

शब्दार्थ-
       १. लोकगीत - लोक+गीत
       २. लोच - लचीलापन, लचक 
       ३. हेय - हीं, तुच्छ 
       ४. शास्त्रीय संगीत - सुर-ताल के नियमों में बांध संगीत
       ५. लोकप्रिय - लोक में प्रिय (लोगों में प्रसिद्ध)
                          सामासिक शब्द (अधी० तत्पुरुष)

मौनवाचन -  छात्रों द्वारा मौनवाचन करना।

कक्षा कार्य -
       * अध्यापक द्वारा संबंधित अनुछेदों से छोटे-छोटे प्रश्न पूछना।
       * छात्रों द्वारा उत्तर देना अथक उत्तर का प्रयास करना।
       * पुनः अध्यापक द्वारा उत्तर संशोधित करके बताना।

प्रश्न - लोकगीत शास्त्रीय संगीत से किन बातों में भिन्न होता हैं?
     - लोकगीत की रचना कौन करता हैं?
     - ये लोकगीत किसकी मदत से गाए जाते हैं?
     - लोकगीत कब-कब गाए जाते हैं?

गृहकार्य - पाठांत प्रश्नों के उत्तर लिखकर लाने के लिए छात्रों को कार्य दिया जाए।

जाँच कार्य - समय सारिणी में दिए गए रिक्त काव्यांश में अध्यापक द्वारा जाँच कार्य किया जाएगा।

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